परमप्रिय मित्र
 
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परमप्रिय मित्र,

आपके वैयक्तिक (और परिवार के)उपयोग के लिए, यह बाइबिल या पुस्तिका आपके पास भेजने में हमें बेहद ख़ुशी हो रही है. ईबाइबिल फेलोशिप की यह उत्‍कट इच्‍छा है कि परमेश्‍वर, अपने धर्मग्रंथ, बाइबिल के वचन आपके हृदय के अंतराल तक पहुँचाते हुए आपको आशीर्वाद दे. और आपको मुक्ति दिलाए.

मैं, इस पत्र के जरिए, आपको यह बताना चाहता हूँ कि इस वक्‍त़, दुनिया में हर एक के लिए जल्‍दबाज़ी करने की नौबत आ पड़ी है. दानिय्येल के धर्मग्रंथ में, परमेश्‍वर ने जगत का अंत होने के बारे में भविष्‍यद्वाणी की और तदनंतर उसे कहा:

दानिय्येल 12:4 परंतु हे दानिय्येल, तू इस पुस्‍तक पर मुहर लगाकर इन वचनों को अंतिम समय तक बंद रख. और बहुत लोग पूछ-ताछ करेंगे और ढूँढ़ेंगे और इससे ज्ञान भी बढ़ जाएगा

और एक बार फिर, थोड़ी देर बाद, इसी अध्‍याय में कहा:

दानिय्येल 12:9 उसने कहा, हे दानिय्येल जा; क्‍यों कि ये बातें अंतिम समय के लिए बंद हैं और इन पर मुहर बंद की गई है.

बाइबिल के गंभीर छात्र के लिए यह बात बिल्‍कुल साफ़ हो गई है कि हम, इस वक्‍त़ ऐसे मोड़ पर हैं जब जगत का अंत होने जा रहा है. वास्‍तव में, चूँकि हम इस वक्‍त़, उस घड़ी के अंतिम चरण में हैं इसलिए, परमेश्‍वर ने यह बात बाइबिल में प्रकट की है और अब हमें, नीचे उल्लिखित वचन से ज़ाहिर कर रहा है:

क्रिस्‍त पूर्व 11,013. --- परमेश्‍वर ने जगत का निर्माण किया. आदम की उत्‍पत्ति हुई.

ईसवी सन् मई 21, 1988. निर्माण से इतिहास का 13,000वाँ वर्ष --- 1988 में चर्च का युग समाप्‍त हुआ. परम आत्‍मा, परमेश्‍वर ने दुनियाभर के सभी गिरिजाघरों और संघों को तिलांजली दी. और अब परमेश्‍वर, अपने (असली) विश्‍वासियों को ईश्‍वरीय आदेश देता है कि वे गिरिजाघरों से बाहर निकल आएँ:

प्रकाशित वाक्‍य 18:4 फिर मैंने स्‍वर्ग से एक और आवाज़ सुनी कि हे, मेरे लोगों, उसमें से निकल आओ; तुम उसके पापों के भागी न हों और उसकी विपत्तियों में से कोई तुम पर न आ पड़े.

ईसवी सन् 1994. --- प्रथम 2300 दिनों की अवधि समाप्‍त हुई (दानिय्येल 8:14) जिसमें दुनियाभर में असल में किसी का भी उद्धार नहीं किया जा रहा था. और सितंबर, 1994 के प्रारंभ में, परमेश्‍वर ने अपनी पवित्र आत्‍मा, दूसरी बार प्रवाहित करना शुरू किया. परमेश्‍वर ने, इस अवधि के लिए एक और नाम दिया है, अगली वर्षा (जोएल 2:23,24) जो 21 मई, 2011 को परमेश्‍वर के तमाम चुनिंदा लोगों की भाव समाधि होने तक चलेगी. इन अभूतपूर्व 17 वर्षों के दौरान, दुनियाभर में गिरिजाघरों के बाहर बहुत बड़ी तादाद में लोगों का उद्धार होगा.

धर्मग्रंथ, उत्‍पत्ति में, परमेश्‍वर, नूह को, आनेवाली बाढ़ के बारे में चेतावनी देता है:

उत्‍पत्ति 7:4 क्‍योंकि सात दिन और बीतने पर मैं पृथ्‍वी पर चालीस दिन और चालीस रात तक जल बरसाता रहूँगा; जितनी वस्‍तुएँ मैंने बनाई हैं उन सब को भूमि से मिटा दूँगा.

आज, ईश्‍वर के बच्‍चों ने बाइबिल से यह सीखा है कि उत्‍पत्ति 7 की भाषा के दो अर्थ बनते हैं. अक्षरश:, नूह और उसके परिवार और जानवरों के पास, आर्क के अंदर प्रवेश पाने के लिए 7 दिन बचे थे; लेकिन आध्‍यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो, परमेश्‍वर दुनिया से कह रहा था और घोषणा कर रहा था कि प्रभु यीशु मसीह द्वारा प्रदान की गई मुक्ति की सुरक्षा में पहुंचने के लिए पापी इनसान को 7000 वर्ष लगेंगे. इस अनुवाक्‍य का अध्‍ययन कर हमने इस बात को जाना है:

2 पतरस 3:8 लेकिन हे, प्रिय जनों, यह एक बात तुमसे छिपी न रहे कि प्रभु के यहाँ एक दिन हज़ार वर्ष के बराबर है और हज़ार वर्ष एक दिन के बराबर हैं.

ईसवी सन् 2011. हम जानते हैं क्रिस्‍त पूर्व 4990 में बाढ़ आई थी (इतिहास की बाइबिल संबंधी समय रेखा के बारे में अधिकारी जानकारी के लिए कृपया FamilyRadio.com देखें). हम इस तारीख का भविष्‍य में भी प्रक्षेपण कर सकते हैं और नतीजतन हम पाते हैं कि वर्ष ईसवी सन् 2011, बाढ़ की तारीख से ठीक 7000 वर्ष बाद आता है (4990 + 2011 = 7001 – 1 क्‍योंकि कोई शून्‍य वर्ष नही है इसलिए = ठीक 7000).

फिर भी परमेश्‍वर ने नूह को बताया कि आर्क के अंदर जाने के लिए 7 दिन रह गए हैं. 2 पतरस, अध्‍याय 3 में बाढ़ के संदर्भ में परमेश्‍वर यह भी कहता है कि एक दिन, 1000 वर्ष के समान है और 1000 वर्ष, एक दिन के बराबर हैं. इस लिहाज़ से, यीशु की शरण में जाने के लिए अब वक्‍त़ तो है ही नहीं. हम, ईसवी 2011 से बस 3 वर्ष की दूरी पर है.

इससे ज्‍यादा अहम बात यह है कि हम यह जानते हैं कि चर्च का युग, 21 मई, 1988 को समाप्‍त हुआ. इससे "घोर विपत्ति "(मत्‍ती 24:21देखें) की शुरुआत हुई जिसमें तमाम गिरिजाघरों में शैतान को अपनी हुकूमत चलाकर बरबादी का घृणास्‍पत कार्य करने की पूरी छूट दी गई. 21 मई, 1988, वह दिन है जब पापी इनसान (स्‍वयं शैतान), मंदिर ( गिरिजाघरों) पर अपना कब्‍ज़ा कर लेगा. हम जानते हैं कि घोर विपत्ति का यह लंबा दौर 23 वर्षों तक रहेगा. यह दौर, ईसवी सन् 21 मई, 1988 से ईसवी सन् 21 मई, 2011 तक रहेगा. उस दिन तक पूरे 23 वर्ष. ठीक 8400 दिन (बेहद महत्‍वपूर्ण है*).

21 मई, 2011 का निर्धारण, बाइबिल के आँकड़ों के अनुरूप किया गया है. लेकिन यह एक संयोग है कि इब्रानी कैलेंडर में 21 मई, 2011, दूसरे महीने का सत्रहवाँ दिन पड़ता है. नूह के कैलेंडर में यह वही दिन है जब बाढ़ आई थी :

उत्‍पत्ति 7:11 जब नूह की अवस्‍था के छह सौंवें वर्ष के दूसरे महीने का सत्रहवाँ दिन आया; उसी दिन बड़े गहरे समुद्र के सब सोते फूट निकलें और आकाश के झरोखे खुल गए… 16: जो गए, वह परमेश्‍वर की आज्ञा के अनुसार सब जाति के प्राणियों में से नर और मादा थे. तब यहोवा ने उसका द्वार बंद कर दिया.

21 मई, 2011, वह दिन है जब परमेश्‍वर, इस जगत का द्वार बंद कर देगा. यह मत भूलें कि बाइबिल में कहा गया है, यीशु ही वह द्वार है :

युहन्‍ना 10:9 द्वार मैं हूँ: यदि कोई मेरे द्वारा भीतर प्रवेश करे तो उद्धार पाएगा और भीतर बाहर आया जाया करेगा और चारा पाएगा.

यीशु ही हमारे लिए स्‍वर्ग के द्वार खोल सकता है. आकाश के साए तले कोई और नहीं है जो हमारा उद्धार कर सके. अगर परमेश्‍वर, द्वार (यीशु) बंद कर दे तो मुक्ति की संभावना ही नहीं रहेगी. और वास्‍तव में, ठीक वही होनेवाला है. 21 मई, 2011 के दिन, विश्‍वासियों को भाव समाधि दी जाएगी और आकाश में प्रभु से मिलने और साथ ही प्रभु के साथ शाश्‍वत रूप से रहने के लिए इस जगत से ले जाया जाएगा. मानव जाति के शेष लोगों (अनगिनत लोगों) को पीछे छोड़ा जाएगा ताकि वे पृथ्‍वी पर 5 महीने की भीषण अवधि तक घोर विपत्ति का अनुभव कर सकें.

उत्‍पत्ति 7:24 और जल, पृथ्‍वी पर एक सौ पचास दिन तक प्रबल रहा (30 दिन के महीनों के 5 महीने).

प्रकाशितवाक्‍य 9:5 और उन्‍हें मार डालने का तो नहीं, पर पाँच महीने तक लोगों को पीड़ा देने का अधिकार दिया गया; और उनकी पीड़ा ऐसी थी, जैसे बिच्‍छू के डंक मारने से मनुष्‍य की होती है.

इस पाँच महीने की अवधि के बाद, मानव जाति और समस्‍त जगत (और ब्रह्मांड) को, 21 अक्‍तूबर, 2001 के दिन अतीव ताप से मिटाया जाएगा. इस अंतिम विनाश के बाद, बदनसीब मानव जाति के सारे जीव नहीं रहेंगे.

बाँटने के लिए और भी बहुत सारे विषय हैं. लेकिन मेरी परमप्रिय आत्‍मा, कृपया यह ध्‍यान में रहे कि मुक्ति की वह घड़ी निकट आ रही है. परमेश्‍वर ने इस जगत के लिए बाढ़ के बाद 7000 वर्ष का अस्तित्‍व दिया है. और अब, उसमें से 6997 वर्ष पूरे हो चुके हैं. 3 वर्ष भी नहीं बचे हैं और इससे पहले कि हमें पता चले, वह रेतघड़ी का समय नहीं रहेगा और सदा के लिए निकल जाएगा.

ईबाइबिलफेलोशिप में हमारी यही प्रार्थना है कि आप, यह बाइबिल(या पुस्तिका),उसी भावना के साथ स्‍वीकार करें जिस भावना से इसे दिया जाता है. और आप इसका यथाशक्ति अध्ययन करें. क्‍योंकि परमेश्‍वर के वचन सुन-सुन कर ही विश्‍वास उत्‍पन्‍न होता है. परमेश्‍वर, बाइबिल पढ़ने और सुननेवाले का उद्धार करता है और उद्धार होने का दूसरा कोई उपाय भी नहीं है. आप स्‍वयं अध्‍ययन करें. अपने परिवार को पढ़कर सुनाएं. आपने जो भी ग्रहण किया हो उसका अपने पड़ोसियों में प्रचार करें. और आप जब कभी अध्‍ययन करें, दया की भीख माँगना न भूलें. बाइबिल के रचयिता, उस कृपालु और करुणानिधान परमेश्‍वर से प्रार्थना करें, वही तुम्‍हारा उद्धार करेगा और तुम्‍हें आनेवाली विपत्ति से बचाएगा. जैसे कि हमने परमेश्‍वर की असीम करुणा दर्शानेवाले उस दृष्‍टांत को पढ़ा है जब उसने नीनवे के लोगों को बचाया:

योना 3:5-10 तब नीनवे के मनुष्‍यों ने परमेश्‍वर के वचन पर विश्‍वास किया (जोडी गई टिप्‍पणी: यह कि उनको 40 दिनों में मिटाया जाएगा) और उपवास का प्रचार किया तथा बड़े से लेकर छोटे तक सब ने टाट ओढ़ा. तब यह समाचार नीनवे के राजा के कान में पहुँचा; और उसने सिंहासन से उठ, अपना राजकीय ओढ़ना उतारकर टाट ओढ़ लिया और राख पर बैठ गया. 7. और राजा तथा उसके प्रधानों की सम्‍मति लेकर नीनवे में इस आज्ञा का ढ़ींढ़ोरा पिटवाया गया कि चाहे मनुष्‍य हो या गाय-बैल या भेड़-बकरी या पशु या कोई भी हो, वे कुछ भी न खाएँ और न ही पीएँ. 8. परंतु मनुष्‍य एवं पशु, दोनों ने टाट ओढ़ें और परमेश्‍वर से चिल्‍ला-चिल्‍लाकर दुहाई करें; और अपने कुमार्ग से फिरें और उस उपद्रव से, जो वे किया करते हैं, पश्‍चाताप करें. 9. संभव है, परमेश्‍वर दया करे और अपनी इच्‍छा बदल दे और उसका भड़का हुआ कोप शांत हो जाए और हम नाश होने से बच जाएँ. 10. जब परमेश्‍वर ने उनके ये काम देखें कि वे कुमार्ग से फिर रहे हैं, अपनी इच्‍छा बदल दी और उनकी जो हानि करने की उसने ठानी ली थी उसे न किया.

* ईबाइबिलफेलोशिप का धर्म-सेवाकार्य उसका खुद का है और इसलिए फैमिली रेडियो के साथ किसी प्रकार की कोई सहबद्धता नहीं है. लेकिन यह गौर करने लायक है कि इस पत्र में दी गई ज्‍यादातर जानकारी, फैमिली रेडियो की इन किताबों से ली गई है जिनका शीर्षक है, “Time has an End” और “We Are Almost There”. आप, फैमिली रेडियो से संपर्क कर सकते हैं या उनके वेबसाइट www.familyradio.com के जरिए दरख्‍वास्‍त कर ये किताबें नि:शुल्‍क पा सकते हैं या इस पते पर लिख सकते हैं: फैमिली रेडियो, हैगनबर्गर रोड, ऑकलैंड, सीए 94621.