बाइबिल में प्रकट हुआ है हम जान सकते हैं मई 21, 2011 इंसाफ़ का दिन है !
 
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बाइबिल में प्रकट हुआ है

हम जान सकते हैं

मई 21, 2011

इंसाफ़ का दिन है !


यह सुनकर कि मई 21, 2011, इंसाफ़ का दिन है, गिरिजा घरों में कई लोग फौरन बाइबिल के इन अनुवाक्‍यों का सहारा लेते हैं जैसे:

मत्‍ती 24:36 उस दिन और उस घड़ी के विषय में कोई नहीं जानता न स्‍वर्ग के दूत, और न पुत्र, परंतु केवल पिता .

“देखो,” इस अनुवाक्‍य का उद्धरण दे कर वे कहते हैं, “ बाइबिल हमसे कहता है कि कोई नहीं जान सकता ”. वे इसमें कुछ जोड़ भी सकते हैं जैसे, “यहां तक कि स्‍वयं यीशु भी समय के बारे में नहीं जानता है; इसलिए आपकी यह मई 21 की तारीख, सब गलत है”. अकसर यही होता है कि फुरती से ऐसा बयान देने और दुनिया का अंत होने की तारीख के बारे में जानकारी को ठुकराने के बाद, वह शख्‍स आश्‍वस्‍त हो जाएगा या हो जाएगी कि ऐसी घटना अब कभी होनेवाली नहीं है . वे सोचते हैं कि “ आखिरकार बाइबिल ही कहता है अंतिम समय के बारे में हम जान नहीं सकते हैं.”

निस्‍संदेह, हम यह कबूल करते हैं कि यह अनुवाक्‍य बाइबिल का ही हिस्‍सा है. लेकिन सवाल यह उठता है कि; क्‍या बाइबिल में अन्‍यत्र, इस विचार का समर्थन किया गया है कि दुनिया का अंत होने के समय के बारे में हम जान नहीं सकते हैं? अथवा, क्‍या बाइबिल में इससे बढ़कर कोई जानकारी है जिससे परमेश्‍वर की प्रजा, दुनिया का अंत होने के समय के बारे में जान सके?

सब से पहले हमें यह स्‍पष्‍ट करना होगा कि यीशु मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर है. और चूंकि यीशु मसीह, सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर है, इसलिए इसमें कोई शक नहीं है कि वह जानता है कि दुनिया का अंत कब होगा.

अय्यूब 24:1 …सर्वशक्तिमान समय के बारे में जानता है … (नोट: यह अनुवाक्‍य केजेवी बाइबिल से लिया गया है)

इस पुस्तिका का उद्देश्‍य बा‍इबिल के पन्‍नों से यह उजागर करना है कि चूंकि अब हम, पृथ्‍वी के इतिहास के आखिर दिन गिन रहे हैं, इसलिए यह परमेश्‍वर की योजना है(और हमेशा यही रही है) कि ठीक समय सहित दुनिया का अंत होने के बारे में बाइबिल में दी गई जानकारी को प्रकट की जाए. उदाहरण के लिए, हम देख सकते हैं कि ग्रंथ के इस उद्धरण में यही विचार व्‍यक्‍त किया गया है:

दानिय्येल 12:4 परंतु हे दानिय्येल ,तू इस पुस्‍तक पर मुहर कर के इन वचनों को अंत समय तक के लिए बंद रख. और बहुत लोग पूछ-पाछ और ढूँढ़-ढ़ांढ़ करेंगे और इससे ज्ञान भी बढ़ जाएगा.

इस अनुवाक्‍य के अनुसार, परमेश्‍वर अपने वचन बंद कर अंत समय तक अपने ग्रंथ (बाइबिल) पर मुहर कर दिया. क्‍योंकि बा‍इबिल में दी गई जानकारी मुहर कर दी गई थी, इसलिए कोई भी इनसान, दुनिया का अंत होने के समय के बारे में न जान सका. लेकिन निर्दिष्‍ट रूप से दानिय्येल 12:4 का निहितार्थ है कि अंत समय आने पर आँखें खोली जाएंगी. और तो और, अंत समय आने पर “ज्ञान भी बढ़ जाएगा”. मत्‍ती 24:36 में घोषणा की गई है कि इस बारे में कोई नहीं जानता “परंतु केवल पिता”. परमेश्‍वर, दुनिया के अंत समय के बारे में सदैव जानता है. चूंकि स्‍वयं परमेश्‍वर, बाइबिल का रचयिता है इसलिए उसे इसमें कोई दिक्‍कत नहीं रही कि वह बाइबिल में यह जानकारी दे कर उसे इस तरह छिपाकर रखे कि वह इतिहास का उचित समय आने तक सुप्‍त अवस्‍था में रहे. अब परमेश्‍वर यह जानकारी अपनी प्रजा को प्रकट कर रहा है.

गिरिजा घर क्‍यों नहीं समझ पाएँगे

अगर आप, इंसाफ़ का दिन होने के नाते 21 मई, 2011 तारीख के बारे में अपने पल्‍ली-पुरोहित से पूछेंगे तो यह बात लगभग निश्चित है कि वह इस घटना का विरोध करेगा. यह वाकई ताज्जुब की बात है कि सारे गिरिजा घर एकबद्ध हो कर यह कैसे घोषणा कर पाते हैं कि “कोई भी उस दिन या घड़ी के बारे में नहीं जानता है”. लेकिन इनकी संयुक्‍त घोषणा से किसी को भी तसल्‍ली नहीं होगी क्‍योंकि निस्‍संदेह हमारे आजकल के गिरिजा घर सत्‍य से काफ़ी हद तक नीचे गिर चुके हैं. दुनिया के गिरिजा घर, बाइबिल के उपदेश के कई मुद्दों से सहमत नहीं हैं और एक दूसरे के प्रतिकूल उपदेश देते रहते हैं(इसका मतलब है कि उनके निष्‍कर्ष में ग़लतियाँ ज़रूर होंगी). इसलिए गिरिजा घरों को इस बात से तसल्‍ली नहीं होनी चाहिए कि “कोई भी उस दिन या घड़ी के बारे में नहीं जानता है” के मुद्दे को लेकर आखिरकार वे, सहमत हुए हैं. उलटे तौर पर यह ख़ासकर ख़तरे का संकेत भी होना चाहिए क्‍योंकि हम जानते हैं कि हमारे समय में, परमेश्‍वर, गिरिजा घरों का उनके विश्‍वासघात के कारण अपना इंसाफ़ करेगा:

1 परतस 4:17 क्‍योंकि वह समय आ पहुँचा है कि पहले परमेश्‍वर के लोगों का न्‍याय किया जाए…

यह एक भयंकर सत्‍य है कि स्‍वयं प्रभु ने, दुनिया के गिरिजा घरों का परित्‍याग किया है. बाइबिल में उपदेश दिया गया है कि चर्च का युग समाप्‍त हो चुका है(वह 1988 ईसवी सन् को समाप्‍त हुआ). प्रभु ने गिरिजा घरों को आध्‍यात्मिक अंधकार में ढकेल दिया है. वे, इस भयावह सत्‍य को कबूल नहीं कर पाते हैं कि अब हम दुनिया का अंत होने के कगार पर खड़े हैं. प्रभु, यशायाह में, आजकल के गिरिजा घरों के आध्‍यात्मिक नेताओं का स्‍पष्‍ट रूप से इस तरह वर्णन करता है:

यशायाह 56:10-11 उसके पहरुए अंधे हैं: वे सबके सब अज्ञानी हैं, वे सब के सब गूँगे कुत्‍ते हैं , जो भौंक नहीं सकते …वे चरवाहे हैं जिनमें समझ नहीं …

स्‍वयं परमेश्‍वर संकेत देता है कि ऐसे कई लोग जो उसकी प्रजा होने का दावा करते हैं, आनेवाली अंतिम घड़ी के ख़तरे के संकेत नहीं देख पाते हैं. परमेश्‍वर, पुराने विधान के इस्राएल/यहूदा का, पुराने विधान के गिरिजा घरों और समागत के प्रकार तथा आंकडों के रूप में उपयोग करता है.

बाइबिल में कहा गया है कि परमेश्‍वर, पुराने विधान के यहूदा से ख़फ़ा था और उसने उनका इंसाफ़ करने के अपने आशय के बारे में पहले से ही आगाह किया. लेकिन यहूदा ने इन चेतावनियों को ठुकरा कर तब तक नज़रंदाज़ किया जब तक उनका विनाश न हो गया – आजकल के गिरिजा घरों की तरह, जो वही बात दोहरा रहे हैं:

यिर्मयाह 8:7 आकाश में लगलग भी अपने नियत समय को जानता है; और पणडुकी, सूपाबेनी और सारस भी अपने आने का समय रखते हैं; परंतु मेरी प्रजा यहोवा का नियम नहीं जानती.

अब अंतिम घड़ी में, नए विधान के गिरिजा घर वही ग़लतियाँ दोहरा रहे हैं जो पुराने विधान के इस्राएल ने की थी. वे, परमेश्‍वर की चेतावनियों(बाइबिल से) को ठीक तरह उसी तरह ठुकरा रहे हैं जिस तरह इस्राएल ने अपने पास भेजे गए प्रभु के भविष्‍यद्वक्‍ताओं के जरिए दी गई परमेश्‍वर की चेतावनियों को ठुकराया था.

परमेश्‍वर अपनी प्रजा को हमेशा आगाह करता है

अब यही वक़्त है कि हम बाइबिल में दी गई अन्‍य जानकारी की तरफ़ नज़र डालें जिसके बारे में आपके गिरिजा घर का पल्‍ली-पुरोहित संभवत: यह नहीं चाहेगा कि आप उस पर विचार करें. लेकिन यह सिद्ध करने के लिए कि दुनिया का अंत होने के समय के बारे में हम जान सकते हैं, हमें सबसे पहले यह देखना होगा कि बाइबिल में अन्‍यत्र इस बारे में क्‍या उल्‍लेख है. उदाहरण के लिए परमेश्‍वर ने आमोस की किताब के अध्‍याय-3 में यह बयान दिया है:

आमोस 3:7 इसी प्रकार प्रभु यहोवा अपने दास भविष्‍यद्वक्‍ताओं पर अपना मर्म बिना प्रकट किए कुछ भी नहीं करेगा.

आध्‍यात्मिक दृष्टि से देखें तो भविष्‍यद्वक्‍ता वही होता है जो परेमेश्‍वर के वचन घोषित करे. इसलिए जब हम यीशु का शुभसंदेश दूसरे लोगों के साथ बाँटते हैं तो एक आस्तिक व्‍यक्ति भविष्‍यद्वक्‍ता की भूमिका निभा लेता है. प्रभु यहोवा, आमोस 3:17 में हमसे कहता है कि वह अपनी प्रजा को अपना मर्म प्रकट करेगा. वह कहता है कि वह अपने दास भविष्‍यद्वक्‍ता पर अपना मर्म बिना प्रकट किए कुछ भी नहीं करेगा. जैसे-जैसे हम बाइबिल के पन्‍नों को छानते जाएँगे हमें यह महत्‍वपूर्ण सत्‍य, बार-बार नज़र आता है. अगर हम नूह के बाढ़ के दिन की ओर नज़र डालेंगे तो:

उत्‍पत्ति 6:3,5,7 और यहोवा ने कहा…उसकी आयु एक सौ बीस वर्ष की होगी …और यहोवा ने देखा कि मनुष्‍यों की बुराई पृथ्‍वी पर बढ़ बई है और उनके मन के विचार में जो कुछ उत्‍पन्‍न होता है सो निरंतर बुरा ही होता है …और यहोवा ने सोचा कि मैं मनुष्‍य को मिटा दूँगा …

इस कथन में हम पाते हैं कि परमेश्‍वर ने दुनिया को, उसे मिटाने से पहले 120 वर्ष दिए. यह वक्‍त ज़रूरी था क्‍योंकि प्रभु ने नूह को जहाज बनाने और उन 120 वर्षों के दौरान दुनिया को चेतावनी देने का कार्य संपन्‍न करने के लिए चुना. बाइबिल, नूह को “ धर्म के प्रचारक ” (2 परतस 2:5) के रूप में पहचानता है. दीर्घ वर्षों के दौरान जहाज बनाने का उसका कार्य, निश्चित रूप से किसी से अनदेखा न रहा होगा. जहाज बनाना, परेमेश्‍वर पर विश्‍वास का महान प्रमाण है और जहाज का अस्तित्‍व और उसका विकास भी दुनिया की ही लगातार निंदा करने के रूप में काम आया है:

इब्रानियों 11:7 विश्‍वास ही से नूह ने उन बातों के विषय में जो उस समय दिखाई न पड़ती थी, चितौनी पाकर भक्ति के साथ अपने घराने के बचाव के लिए जहाज बनाया और उसके द्वारा उसने संसार को दोषी ठहराया; और उस धर्म का वारिस हुआ जो विश्‍वास से होता है …

इसी 120वें वर्ष में (4990 ईसा पूर्व) प्रभु ने एक बार फिर नूह को बाढ़ के समय के बारे में अधिक जानकारी दी. इसी मोड़ पर परमेश्‍वर ने निर्दिष्‍ट जानकारी दी.

ताज्‍जुब है कि नूह की घटना से पहले परमेश्वर ने नूह को आगामी जलप्रलय के निर्दिष्‍ट वर्ष, महीने और दिन के बारे में बताया:

उत्‍पत्ति 7:1,4,10-11 और यहोवा ने नूह से कहा…क्‍योंकि अब सात दिन और बीतने पर मैं पृथ्‍वी पर चालीस दिन और चालीस रात तक जल बरसाता रहूँगा …और सात दिन के उपरांत प्रलय का जल पृथ्‍वी पर आने लगा. जब नूह की अवस्‍था के छ: सौ वर्ष के दूसरे महीने का सत्रहवां दिन आया

यह कोई संयोग नहीं है कि हमारे वर्तमान में परमेश्‍वर की प्रजा जानती है कि वर्ष 2011 में(बाढ़ के ठीक 7,000 वर्ष बाद), मई के महीने में और 21वें दिन दुनिया का अंत होगा. यह उस बात से बिल्‍कुल ठीक बैठती है जो प्रभु ने नूह से कही. यह भी याद रहें कि 2011 में 21 मई, इब्रानी कैलेंडर के दूसरे महीने का 17वां दिन पड़ता है, जो वह समतुल्‍य तारीख बनती है जब प्रभु ने नूह और उसके परिवार को जहाज में बंद कर दिया. साथ ही, हमें यह भी याद रखना चाहिए कि यीशु, अपने ही आने की ख्रबर देने के लिए उदाहरण के तौर पर बाढ़ का जिक्र करता है:

मत्‍ती 24:38-39 क्‍योंकि जैसे जल-प्रलय से पहले के दिनों में, जिस दिन तक नूह जहाज पर न चढ़ा, उस दिन तक लोग खाते-पीते थे और उन में ब्‍याह-शादी होती थी, और जब तक जल-प्रलय उन सब को बहा न ले गया, तब तक उन को कुछ भी मालूम न पडा; वैसे ही मनुष्‍य के पुत्र का आना भी होगा.

यीशु का आना वैसे ही होगा जैसे नूह के दिनों में हुआ था. सत्‍य की खोज में निकले किसी भी ईमानदार साधक को अब यह सवाल करना चाहिए कि बाढ़ आने से पहले आनेवाले बाढ़ के बारे में किसी को कोई ख़बर थी? बाइबिल का जवाब है: हाँ. परमेश्‍वर की प्रजा को मालूम था. नूह जानता था. नूह की पत्‍नी को इसकी ख़बर थी. नूह के तीन पुत्रों और उनकी पत्नियों को भी मालूम था. उनके इर्द-गिर्द की दुनिया को भी पता था क्‍योंकि नूह एक प्रचारक था. लेकिन निस्‍संदेह, उन्‍होंने नूह को पागल करार दिया था. परिणामस्‍वरूप, वे सब बाढ़ में नष्‍ट हो गए. बाइबिल में एक ख़ास बात कही गई है कि हर तरह के लोग, परमेश्‍वर की यह चेतावनी सुनते हैं लेकिन उसके चुनिंदा लोग ही उसे कबूल कर अमल में लाते हैं. इसलिए नूह के दिन बाढ़ की भयंकर चपेट में आए लोगों की तादाद को देखते हुए, यह बेहद ज़रूरी है कि हम इस अनुवाक्‍य पर गौर करें:

2 पतरस 2:5 और प्रथम युग के संसार को भी न छोड़ा, वरना भक्तिहीन संसार पर महा जल-प्रलय भेजकर धर्म के प्रचारक नूह समेत आठ व्‍यक्तियों को बचा लिया;

प्रभु जोर देकर कहता है कि नूह के दिन की बाढ़ से वे सभी लोग नष्‍ट हो गए जो “भक्तिहीन” थे.

यह वाकई एक ख़ास तथ्‍य है. परमेश्‍वर से(बचाए गए)तमाम लोगों को बाढ़ की ख़बर दी गई थी और उनको मौत से बचा लिया गया. प्रत्‍येक धार्मिक व्‍यक्ति को इस बात की ख़बर थी कि बाढ़ आनेवाला है और इस वजह से वे, नूह के साथ जहाज के अंदर चले गए. हम निश्चित रूप से कह सकते हैं कि परमेश्‍वर ने नूह के दिन दुनिया के दूसरे लोगों को आगाह किया था लेकिन वे नूह की घोषणाओं को मानने के लिए तैयार नहीं थे. अर्थात्, हम, आमोस 3:7 में दिया गया बाइबिल का सिद्धांत देख सकते हैं. दूसरे लोगों ने बात तो सुनी लेकिन अंत में परमेश्‍वर की चेतावनियों को नजरंदाज कर दिया. नजीजतन, वे अपनी हिफ़ाज़त न करने की वजह से नष्‍ट हो गए. यही वजह है बाइबिल में उल्‍लेख किया गया है कि “जैसे रात को चोर आता है” वैसे ही प्रभु यीशु का दिन आनेवाला है.

इसी तथ्‍य पर कि परमेश्‍वर ने नूह और उसके परिवार को पहले से ही आगाह किया, हमें इत्मीनान से सोचकर महसूर करना चाहिए कि प्रभु, इंसाफ़ का दिन आने से पहले उसी तरह दुनिया का अंत होने के समय के बारे में खु़लासा करेगा. लेकिन बा‍इबिल के इतिहास के पन्‍नों में परमेश्‍वर के कार्य के बारे में विचार करने के लिए हमें इससे बढ़कर बहुत सी सामग्री मिलेगी.

चलें हम सदोम और अमोरा के विनाश की तरफ़ एक नज़र डालें. सदोम और अमोरा शहरों को मिटाने से पहले प्रभु ने इब्राहीम के पास जा कर उन शहरों पर अपनी इंसाफ़ की योजना के बारे में खु़लासा किया. इस लिहाज से यह उल्‍लेखनीय है कि:

उत्‍पत्ति 18:16-17 …वे पुरुष…सदोम की ओर ताकने लगे …तब यहोवा ने कहा, यह जो मैं करता हूँ सो क्‍या इब्राहीम से छिपा रखूँ ;

परमेश्‍वर ने सदोम और अमोरा को मिटाने की अपनी योजना इब्राहीम से नहीं छिपाई. प्रभु ने सोचा कि यह जानकारी अपने दास के साथ बाँटना उचित होगा. सूचना मिलते ही, इब्राहीम ने शहर के अंदर बसे धार्मिक लोगों की ख़ातिर निवेदन(प्रार्थना) करना शुरु किया. इब्राहीम का भतीजा, लूत सदोम में रहता था. बाइबिल में उल्‍लेख है कि लूत एक धार्मिक व्‍यक्ति था(अर्थात, परमेश्‍वर ने उसे बचाया और यीशु के जरिए उसे धामिक व्‍यक्ति बनाया, देखें पतरस 2:7-8).

परमेश्‍वर, धार्मिक व्‍यक्तियों को दुष्‍ट लोगों के साथ नष्‍ट न कर सका. इसलिए उसे हस्‍तक्षेप करना पडा. परमेश्‍वर ने लूत को आगामी इंसाफ़ के बारे में आगाह किया:

उत्‍पत्ति 19:12-13 फिर उन पाहुनों ने लूत से पूछा, यहाँ और कौन-कौन है ? दामाद, बेटे, बेटियाँ,…उन सब को लेकर इस स्‍थान से निकल जा. क्‍योंकि हम यह स्‍थान नष्‍ट करनेवाले हैं …यहोवा ने हमें इसका सत्‍यानाश करने के लिए भेजा है .

लूत और उसके परिवार के कुछ गिने-चुने सदस्‍य, सदोम और अमोरा के विनाश से इसलिए बच सके कि स्‍वयं प्रभु ने उसे पहले से ही आगाह कर ख़बर दी थी जिसे लूत ने अपने दामादों के साथ बाँटने का प्रयत्‍न किया लेकिन उन्‍होंने उसकी बात गंभीरता से नहीं ली(उत्‍पत्ति 19:14). हमें इस बात का भी लिहाज़ करना होगा कि यीशु कहता है कि उसका आना वैसे ही होना जैसे लूत के दिनों में हुआ था:

लूका 17:28-30 और जैसा लूत के दिनों में हुआ था कि लोग खाते-पीते, लेन-देन करते, पेड़ लगाते और घर बनाते थे; परंतु जिस दिन लूत सदोम से निकला, उस दिन आग और गंधक आकाश से बरसी और सब का नाश कर दिया . मनुष्‍य के पुत्र के प्रकट होने के दिन भी ऐसा ही होगा.

सत्‍य यह है कि लूत के दिनों में, परमेश्‍वर ने सदोम पर होनेवाले भयंकर इंसाफ़ के बारे में अपनी प्रजा को पहले से ही चेतावनी दी. साथ ही, दूसरे लोगों को पहले से ही आगाह करने के बावजूद उन्‍होंने ऐसी चेतावनियों को अनसुना कर दिया. यह एक ऐतिहासिक तथ्‍य है कि परमेश्‍वर ने पहले से ही इब्राहीम और लूत को आगाह किया. यही तथ्‍य एक बार फिर सिद्ध करता है कि प्रभु, इंसाफ़ का दिन आने से पहले दुनिया का अंत होने के समय के बारे में उसी तरह खु़लासा करेगा और तिस पर भी, हमें विचार करने के लिए ग्रंथ में और बहुत सी सामग्री उपलब्‍ध है.

रात का चोर

खुले आम दावा करनेवाले कई ईसाई गलती से सोचते हैं कि यीशु “चोर की तरह” आएगा और उनको सनातन जीवन प्रदान करेगा. लेकिन लोगों के जेहन में यह बात आई कहां से कि चोर आकर उनको आशीर्वाद देगा? बाइबिल में ठीक समझाया गया है कि चोर किस बहाने आता है:

युहन्‍ना 10:10 चोर किसी और काम के लिए नहीं परंतु चोरी करने और घात करने और नष्‍ट करने को आता है …

यीशु, अपने चुनिंदा लोगों(इसके प्रतिनिधि हैं नूह, इब्राहीम, लूत आदि) की ख़ातिर अचानक एक चोर की भाँति नहीं आएगा लेकिन वह दुनिया के न बचाए गए लोगों के लिए चोर की तरह आएगा:

1 थिस्‍सलुनीकियों 5:2-3 क्‍योंकि तुम अपने आप ठीक जानते हो जैसा रात को चोर आता है वैसा ही प्रभु का दिन आनेवाला है. जब लोग कहते होंगे कि कुशल है और भय नहीं तो उन पर एकाएक विनाश आ पढ़ेगा, जिस प्रकार गर्भवती पर पीड़ा और वे किसी रीति से न बचेंगे .

चूंकि प्रभु, उन पर “एकाएक विनाश” का वर्णन और यह घोषणा कर रहा है कि “वे नहीं बचेंगे”, इसलिए यह बिल्‍कुल ज़ाहिर है कि ये “दुष्‍ट” ही हैं. इन दुष्‍ट लोगों का घात करने और उनको नष्‍ट करने के लिए यीशु, “चोर की तरह” आएगा. लेकिन अगले अनुवाक्‍य पर गौर करें:

1 थिस्‍सलुनीकियों 5:4 पर हे भाइयों, तुम तो अन्‍धकार में नहीं हो कि तुम पर वह दिन चुपके से चोर की तरह आ जाए.

हम स्‍पष्‍ट रूप से देख सकते हैं कि परमेश्‍वर की प्रजा को अचरज नहीं होगा. उनको अचरज होगा भी कैसे क्‍योंकि प्रभु, अपनी प्रजा को आगाह करने से पहले कुछ भी नहीं करता है? परमेश्‍वर ने नूह को चेताया. परमेश्‍वर ने इब्राहीम को आगाह किया. परमेश्‍वर ने लूत को चेतावनी दी. कोई यह कैसे सोच सकता है कि परमेश्‍वर, अपनी प्रजा को कमतर प्रकार के इंसाफ़ के दिन के बारे में आगाह करेगा और अपने ही प्रतिमान का पालन न करते हुए इंसाफ़ के वास्‍तविक दिन के समय जीवित दुनिया भर के करीब 7 अरब लोगों को आगाह करेगा? और तो और, हम देखते हैं कि यीशु ने सब को आदेश दिया कि वे “जागृत” रहें क्‍योंकि वे नहीं जान सकेंगे कि वह किस घड़ी आएगा. यीशु, उन लोगों के लिए चोर की तरह आएगा जो जागृत नहीं हैं:

प्रकाशित वाक्‍य 3:3यदि तू जागृत नहीं रहेगा तो मैं चोर की तरह आऊँगा और तू कदापि न जान सकेगा कि मैं किस घड़ी तुझ पर आ पड़ूँगा .

अर्थात् यीशु ने असली आस्तिकों को आदेश दिया वे बाइबिल का पठन (अवलोकन करते)रहें. उसकी प्रजा को परमेश्‍वर के वचनों का अध्‍ययन करते रहना चाहिए. यह इसलिए कि सही वक्‍त पर उन शब्‍दों को, जो मुहरबंद पड़ी हैं, समझाने के लिए वह हमारी आँखें खोलेगा. चूंकि जागृत रही प्रजा इन बातों को सहज ही समझ पाएगी इसलिए यीशु इनके लिए “रात के चोर की तरह” नहीं आएगा. यीशु, सिर्फ़ उन लोगों के लिए “ चोर की तरह” आएगा जो आग्रह करते रहते हैं कि यीशु के आने के समय के बारे में हम जान नहीं सकते हैं. इस बात को हठपूर्वक कहते हुए कि समय के बारे में जानना संभव नहीं है, गिरिजा घर यह संकेत दे रहे हैं कि वे अंधकार में छिपे हैं और जागृत रहने का उनका कोई इरादा नहीं है. यह किसी के लिए भी वाकई एकदम गंभीर बात है जो जिद्दी तौर पर दृढ़ता से कहता है कि हम अंतिम समय के बारे में जान नहीं सकेंगे. ऐसी बातें इसलिए उभरती हैं कि जब यीशु उन पर आ पड़ेगा तो “एक चोर” की तरह आ पड़ेगा और वे एकाएक नष्‍ट हो जाएंगे और परमेश्‍वर के भयंकर इंसाफ़ से बच नहीं पाएँगे. ये सारे घटनाक्रम बेहद दुखदायक हैं; लेकिन प्रभु, हम में से हर एक को बाइबिल में दिए गए नीनवे के उदाहरण के जरिए हमें काफ़ी बढ़ावा देता है. नीनवे के लोगों ने भी आगामी इंसाफ़ के बारे में परमेश्‍वर की चेतावनी को सुना.

नीनवे के लोगों का दृष्‍टांत

परमेश्‍वर ने भविष्‍यद्वक्‍ता योना को नीनवे भेजा ताकि एक ही वाक्‍य में समाया गया अद्भुत संदेश मिल सके:

योना 3:4 … योना…योना ने कहा, चालीस दिन के बीतने पर नीनवे उलट दिया जाएगा .

यह महज चंद लफ़्ज़ थे! यह एक समग्र संदेश था जिसे परमेश्‍वर ने योना को नीनवे के वासियों तक पहुंचाने का आदेश दिया था. इस संदेश में बुनियादी तौर पर दो तत्‍व हैं: समय (40 दिन) और इंसाफ़ (उलट दिया जाना). नीनवे के वासियों को आगाह करने के इरादे से प्रभु द्वारा योना को भेजने की यह यथार्थ ऐतिहासिक घटना एक बार फिर बाइबिल में परमेश्‍वर के प्रतिमान को पुख्ता करती है कि लोगों पर अपनी कहर बरसाने से पहले परमेश्‍वर उनको आगाह करता है. अगला अनुवाक्‍य पढ़ेंगे तो हम वाकई हैरान हो जाएंगे:

योना 3:5 तब नीनवे के मनुष्‍यों ने परमेश्‍वर के वचन की प्रतीति की …

इसे बस एक इनसान की नजरिए से देखें. नीनवे के वासी, अश्‍शूरी थे. यो‍ना अश्‍शूरी नहीं था. स्‍वाभाविक है कि वह उनकी भाषा बोल नहीं पाता था. वह न केवल दूसरे देश का था बल्कि दुश्‍मन के देश का था. अचानक इस अजीब इनसान ने प्रत्‍यक्ष हो कर घोषणा की “चालीस दिन के बीतने पर नीनवे उलट दिया जाएगा ”.

इसके बदले में क्‍या आपको लगता है कि नीनवे के लोगों के मन में कोई दूसरी तरह की प्रतिक्रिया आई होगी जैसे मज़ाक़, अथवा हँसी अथवा सरासर अविश्‍वास? हमारी आधुनिक दुनिया में, हम बस यही सोचेंगे, “एक बुद्धुराम ही इस तरह के संदेशों पर विश्‍वास करेगा!” जी हाँ, हम आज के परिवेश में आसानी से कई वजह ढूँढ़ सकते हैं कि कोई व्‍यक्ति ऐसी बेतुकी बातों पर भरोसा क्‍यों नहीं कर पाएगा, लेकिन नीनवे के लोगों ने विश्‍वास किया. ऐसी कौन सी बात रही होगी जिससे नीनवे के लोग संभवत: क़ायल हुए होंगे कि इस भयानक ख़बर में सच्‍चाई है और इसे वास्‍तव में परमेश्‍वर ने भिजवाया है? निश्चित रूप से सबूत का कोई ग्रांथिक आधार प्रमाण नहीं था. योना ने, बाइबिल के उपदेशों के अध्‍ययन का कोई विश्‍वकोश अपने साथ ला कर उसे नीनवे के शहर की दहलीज पर नहीं रखा था. बिल्‍कुल नहीं! उसने बस एक ही वाक्‍य कहा — सबसे ज्‍यादा कमज़ोर सबूत – और फिर भी उन्‍होंने उस पर विश्‍वास किया:

मत्‍ती 12:41 नीनवे के लोग न्‍याय के दिन इस युग के लोगों के साथ उठकर उन्‍हें दोषी ठहराएँगे; क्‍योंकि उन्‍होंने यूनुस का प्रचार सुन कर मन फिराया …

अब आपने इंसाफ़ का दिन होने के नाते शनिवार, मई 21, 2011 के बारे में सुना है. कदापि आपने ज्‍यादातर बाइबिल के साक्ष्‍य के बारे में सुना है; और फिर भी, आप परमेश्‍वर पर विश्‍वास नहीं करते हैं. क्‍या आपको इससे भी ज्‍यादा सबूतों की जरूरत है ? नीनवे के लोगों के पास जानकारी का भंडार हासिल करने की सुविधा नहीं थी जो आज हमें नसीब है. बस उनके पास ग्रंथ का एक महज अनुवाक्‍य था जिस पर उन्‍होंने भरोसा किया. आज हम बाइबिल से निकली बहुत सारी जानकारी लोगों को दे पा रहे हैं (मई 21, 2011 को आनेवाले इंसाफ़ के दिन के बारे में अधिक जानकारी हासिल करने के लिए, ईबीएफ की फैमिली रेडियो के साथ कोई सहबद्धता न होते हुए भी हमारी यह सिफ़ारिश है कि आप इस पते पर : फैमिली रेडियो, ऑकलैंड सीए 94261, संपर्क कर, “We Are Almost There!” किताब की प्रति मुफ़्त में हासिल करें या यहाँ ऑनलाइन पढ़ें: www.familyradio.com ). लेकिन जानकारी का भंडार ही क्‍यों न दिया जाए, इससे कोई भी क़ायल नहीं हो पाएगा. यीशु ने यह बात तब समझाई जब उसने कहा:

युहन्‍ना 8:47 जो परमेश्‍वर की ओर से होता है वह परमेश्‍वर की बातें सुनता है: और तुम इसलिए नहीं सुनते कि परमेश्‍वर की ओर से नहीं हो .

कृपया गौर करें कि नीनवे के लोगों ने कितनी गंभीरता से परमेश्‍वर पर भरोसा किया और फौरन उसकी बातों पर अमल किया :

योना 3:6-8 तब यह समाचार नीनवे के राजा के कान में पहुंचा और उसने सिंहासन पर से उठ अपना राजकीय ओढ़ना उतारकर टाट ओढ़ लिया और राख पर बैठ गया …ढिंढोरा पिटवाया …मनुष्‍य और पशु दोनों टाट ओढ़ें और परमेश्‍वर की दुहाई चिल्‍ला-चिल्‍ला कर दें और अपने कुमार्ग से फिरें …

समय और इंसाफ़ को भाँपना

बाइबिल के इतिहास के पन्‍नों को तराशते हुए हमने देखा है कि किस तरह से प्रभु ने इंसाफ़ की घटना घटने से पहले आगामी इंसाफ़ के समय के बारे में अपनी प्रजा को बार-बार कैसे सूचना देता रहा है. यह बात बाइबिल के समग्र इतिहास में इस क़दर लगातार गूँजती रही है कि इसे निश्चित रूप से बाइबिल का एक सिद्धांत माना जा सकता है जैसे आमोस ने 3:7 में कहा गया है, “प्रभु यहोवा, अपने दास भविष्‍यद्वक्‍ताओं पर अपना मर्म बिना प्रकट किए कुछ न करेगा.

बाइबिल में, प्रभु ने मानव जाति को दो समूहों में विभाजित किया है. जिनको वह बचाता है उनको “बुद्धिमान” कहा गया है और जिनको वह नहीं बचाता है उनको “मूर्ख” कहा गया है. वह उनका “धार्मिक” अथवा “दुष्‍ट” के रूप में भी वर्णन करता है. लेकिन दोनों के बीच के प्रभेद का किसी प्रकार की बुद्धिमानी या मानवीय पांडित्‍य या योग्‍यता से कोई सरोकार नहीं है. अगर हम सीधी-सादी भाषा में कहें तो हम उसे बुद्धिमान कहेंगे(और धार्मिक घोषित करेंगे)जिसे परमेश्‍वर ने बचाया हो और यीशु मसीह की आत्‍मा दी हो; जिनको न बचाया गया हो वे मूर्ख या दुष्‍ट माने जाएँगे क्‍योंकि उनके पास यीशु मसीह की आत्‍मा(ज्ञान)नहीं है. अगर हम ज्ञान के बारे में बाइबिल की परिभाषा को जेहन में रखेंगे तो इन अनुवाक्‍यों को समझने में हमें काफ़ी मदद मिलेगी:

दानिय्येल 12:9-10 …हे दानिय्येल, चला जा: क्‍योंकि ये बातें अंत समय के लिए बंद हैं औरे इन पर मुहर दी हुई है…दुष्‍टों में कोई ये बातें न समझेगा ; परंतु जो बुद्धिमान हैं वे ही समझेंगे.

लगभग निश्चित रूप से कह सकते हैं, प्रभु का इरादा, अंतिम समय आने तक उसके वचनों(बाइबिल)को मुहरबंद करने का था. लेकिन इस बात पर गौर करें कि परमेश्‍वर, किस तरह से इशारा करता है कि “दुष्‍टों में से कोई” ये बातें कैसे नहीं समझ पाएगा. इसमें समझनेवाली बात कौन सी है? बस, वह परमेश्‍वर के उन वचनों की तरफ़ इशारा कर रहा है जिसे अंतिम समय पर समझाया जाएगा. दुनिया के जिन लोगों को नहीं बचाया जाएगा वे इन बातों को समझ नहीं पाएंगे उसी तरह से, जिस तरह से नूह के दिन दुनिया के लोगों ने बाढ़ की चेतावनी को ठुकराया और लूत के दामादों ने शहर छोडकर निकल जाने की चेतावनी को अनसुना कर दिया. इसी प्रकार, आज भी न बचाए गए लोग इन बातों को समझ नहीं पाएंगे. “बुद्धिमान” परमेश्‍वर की महान करुणा के कारण समझ पाते हैं. प्रभु, यह सत्‍य एक बार फिर इन अद्भुत अनुवाक्‍यों में प्रकट करता है:

सभोपदेशक 8:5 …और बुद्धिमान का मन समय और न्‍याय का भेद जानता है .

नीति वचन 28:5 बुरे लोग न्‍याय को नहीं समझ सकते: परंतु यहोवा को ढूँढ़नेवाले सब सब कुछ समझ सकते हैं.

अंत में, 2011 में मई 21, इंसाफ़ का दिन होगा या नहीं यह बात इस पर निर्भर होगी कि क्‍या परमेश्‍वर ने इन बातों को समझने के लिए हमारी आँखें खोली हैं या नहीं. अगर उसने हमारी आँखें खोली हों तो हम यह जान जाएँगे कि मई 21, 2011, प्रभु के कहर का दिन होगा. अगर उसने हमारी आँखें न खोली हों तो हम जान नहीं पाएंगे. बाइबिल में कहा गया है कि दुनिया के अधिकतर लोगों को उद्धार करने के लिए नहीं चुना जाता है. इसी वजह से, अरबों लोगों की ख़ातिर यीशु अचानक आएगा. वे आध्‍या‍त्मिक बातें नहीं समझते हैं. चूँकि परमेश्‍वर की आत्‍मा उनके पास नहीं है इसलिए वे चेतावनी को कबूत नहीं करेंगे और समझ नहीं पाएंगे. दुःख की बात है कि वे निश्चित रूप से नष्‍ट हो जाएंगे:

यहेजकेल 33:4-5 जो कोई नरसिंगे का शब्‍द सुनने पर न चेते और तलवार के चलने से मर जाए, उसका खून उसी के सिर पड़ेगा…परंतु यदि वह चेत जाता तो अपना प्राण बचा लेता.

परमेश्‍वर की प्रजा(नीनवे के लोगों की तरह) जानती है कि ये तारीखें इसलिए सही और भरोसेमंद हैं कि ये जानकारी सीधे बा‍इबिल से मिली है. कई लोग अपने गिरिजा घरों पर अथवा अपने पल्‍ली-पुरोहितों पर विश्‍वास करेंगे जो हर हाल में उनको समझाएंगे कि उनको एक तारीख को लेकर चिंतित होने की ज़रूरत नहीं है. लेकिन इनमें से कोई भी बात भरोसेमंद नहीं है. सत्‍य यह है कि दुनिया में भरोसमंद चीज सिर्फ़ बाइबिल है. इसी वजह से, जैसे-जैसे हम मई 21, 2011 की तारीख के करीब होते जाएंगे, प्रत्‍येक व्‍यक्ति के सामने एक ही बड़ा सवाल होगा “क्‍या तुम्‍हारा विश्‍वास बाइबिल पर है या किसी दूसरी चीज पर?”

नीति वचन 3:5 तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरना संपूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना .

भजन संहिता 119:42 …क्‍योंकि मेरा भरोसा तेरे वचन पर .

 


 

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प्रेरितों के काम 17:30-31 इसलिए परमेश्‍वर ने अज्ञानता के समयों पर ध्‍यान नहीं दिया; पर अब हर जगह सब मनुषों को मन फिराने की आज्ञा देता है: क्‍योंकि उसने एक दिन ठहराया है, जिसमें वह उस मनुष्‍य के द्वारा धर्म से जगत का न्‍याय करेगा जिसे उसने ठहराया है …

WeCanKnow.1.18.2010-Hindi